संस्कृत भाषा की ही नहीं विश्व कि अधिकांश भाषाओँ की जननी है। संस्कृत को संसार की सारी भाषाओं की जननी माना जाता है। संस्कृत साहित्य में भारतीय संस्कृति एवं भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की निधि भरी पड़ी है। संस्कृत भाषा का साहित्य बहुत महान् है क्योंकि इसमें हमारे पुराने ऋषि-मुनियों द्वारा अर्जित किया गया ज्ञान है। जब तक हमारे छात्र संस्कृत भाषा को नहीं जानते तब तक वह हमारे महान ऋषिओं द्वारा दिए गए विकास से वंचित रह जांएगे। संस्कृत भाषा के ज्ञान के बिना उससे हमारे छात्र अपरिचित रहेंगे।
संस्कृत भारत की राष्ट्रीय एकता का सूत्र भी है। विद्या भारती ने इसी कारण संस्कृत भाषा के शिक्षण को अपने विद्यालय में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। विद्याा भारती ने संस्कृत विभाग की स्थापना हरियाणा के कुरूक्षेत्र में की गई है। इस विभाग ने सम्भाषण पद्धति के आधार पर “देववाणी संस्कृतम” नाम से पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है। संस्कृत के आचार्यों का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इस विभाग के द्वारा संचालित होता ह।





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