आचार्यों द्वारा परिवारों में जाकर अभिभावकों से संपर्क स्थापित करना विद्या भारती के विद्यालयों के शिक्षण एवं संस्कार प्रक्रिया का अंग माना जाता है। बालकों को अपनी संस्कृति, धर्म एवं सामाजिक चेतना के जो संस्कार विद्यालय में प्राप्त हो रहे हैं वे उन्हें परिवारों में भी मिलें तभी उनके जीवन का सही विकास संभव होता है। आचार्यों एवं अभिभावकों के निरंतर एवं सजीव संपर्क के कारण परिवारों में संस्कारक्षम वातावरण निर्मित करने में सफलता प्राप्त की है। पुण्यभूमि भारत, श्रीराम एवं अन्य महापुरुषों के चित्र, हिन्दू तिथि-पंचांग आदि लाखों के संख्या में परिवारों में पहुंचे हैं।
आज परिवारों में विशेष रूप से महानगरों में ईसाईयों के समान पाश्चात्य विधि से बालकों के जन्मदिवस मानाने के प्रथा चल पड़ी है। विद्या भारती ने हिन्दू विधि से जन्म दिवस मनाने सम्बन्धी एक पुस्तिका एवं गीत कैसेट तेयार कराकर छात्रों के घरों में पहुंचाए हैं। इसके कारण घरों में हिंदुत्व का वातावरण निर्मित हुआ है। प्रातः स्मरण, एकात्मता स्तोत्र एवं भोजन-मन्त्र नित्य बोलने का प्रचलन भी परिवारों में बढ़ रहा है।





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