अखिल भारतीय खेलकूद समारोह

विद्या भारती ने प। पू। डॉ। हेडगेवार के जन्म शताब्दी वर्ष 1988-89 से अखिल भारतीय खेलकूद समारोह का आयोजन प्रारम्भ किया है। इस समारोह में बाल, किशोर, तरुण अर्थात कक्षा अष्टम तक, कक्षा दशम तक, कक्षा द्वादश तक के छात्र-छात्राएँ अलग-अलग समूहों में भाग लेते हैं। कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, जूडो, वालीबाल आदि खेलकूद (एथलेटिक्स) के विषय रहते हैं। प्रत्येक खिलाड़ी अधिक से अधिक तीन खेलों में भाग ले सकता है। यह खेलकूद कार्यक्रम विद्यालय स्तर से प्रारम्भ होकर जिला, संभाग, प्रदेश, क्षेत्र एवं अंत में अखिल भारतीय स्तर तक संपन्न होता है। क्षेत्र में विभिन्न खेलों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी छात्र-छात्राएँ ही अखिल भारतीय स्तर पर भाग ले सकते हैं।

इस खेलकूद समारोह में प्रतिभागी छात्र-छात्राएँ विश्व रिकॉर्ड के बराबरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह विद्या भारती एवं देश के लिए गौरव की बात है। हमारे युवक बलवान हों। युवक-युवतियां बलवान होंगे तो भारत बलवान होगा। बल के साथ संस्कार भी हों - बिना संस्कार के बलशाली विवेकहीन हो जाता है। समाज को उसका लाभ नहीं मिल पाता। संस्कारित बलवान युवक ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है। विद्या भारती इसी ध्येय वाक्य को लेकर खेलकूद समारोह आयोजित करती है। इस खेलकूद समारोह का सबसे आकर्षण एवं प्रभावी स्वरुप यह होता है कि इसमें लघु भारत के दर्शन होते हैं। राष्ट्रीय एकात्मकता का सहजभाव सभी के मन मैं हिलोरे लेने लगता है। एस। जी। एफ़। आई। ने इसे मान्यता प्रदान की है।